- सुजाता साहा
रायपुर-बिलासपुर मुख्य रेलवे मार्ग पर स्थित खमतराई रेलवे क्रॉसिंग राजधानी की सबसे गंभीर यातायात समस्याओं में से एक बन चुकी है। देश के प्रमुख रेल मार्गों में शामिल इस लाइन पर प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। परिणामस्वरूप फाटक बार-बार बंद रहता है और एक बार फाटक बंद होने के बाद कई बार 4 से 5 ट्रेनों के गुजरने तक लोगों को इंतजार करना पड़ता है।
स्थिति ऐसी है कि भीषण गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड के बीच स्कूली बच्चे, मरीज, वाहन चालक और आम राहगीर 20 से 30 मिनट तक सड़क पर खड़े रहने को मजबूर हो जाते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।
खमतराई, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी, श्रीनगर, गुढ़ियारी, गोगांव और शिवानंद नगर सहित आसपास के क्षेत्रों की लगभग 65 हजार से अधिक आबादी इस मार्ग पर निर्भर है। क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, थोक बाजार और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थित होने के कारण दिनभर यातायात का भारी दबाव बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से लगने वाले जाम के कारण रोजाना समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।
हाल ही में कचना रेलवे ओवरब्रिज के शुरू होने से उस क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। इसके बाद अब खमतराई क्षेत्र के रहवासी भी लंबे समय से लंबित अंडरब्रिज अथवा ओवरब्रिज परियोजना को शीघ्र प्रारंभ करने की मांग कर रहे हैं।
खमतराई रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरब्रिज निर्माण की परियोजना कई वर्षों से प्रस्तावित है, लेकिन अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। हालांकि रेलवे जोन मुख्यालय द्वारा इसकी ड्राइंग एवं डिजाइन को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार आगामी एक माह में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है तथा वर्ष 2027 तक परियोजना पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ज्ञात हो कि यह परियोजना नई नहीं है। वर्ष 2016-17 में इसे लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति मिली थी, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। लगभग एक दशक की देरी के कारण अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 17 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस दौरान क्षेत्र की जनता लगातार परेशान होती रही, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए न तो जनप्रतिनिधियों ने अपेक्षित पहल की और न ही किसी बड़े सामाजिक संगठन ने प्रभावी दबाव बनाया। इस अवधि में राज्य में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सरकारें रहीं, फिर भी परियोजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी।
परियोजना में हुई देरी का खामियाजा दोहरी तरह से जनता को भुगतना पड़ा है। एक ओर निर्माण लागत लगभग तीन गुना तक बढ़ गई, वहीं दूसरी ओर हजारों नागरिक वर्षों से जाम, समय की बर्बादी और असुविधा झेलने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा और उन्हें इस पुरानी समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।
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