Monday, 29 November 2021

एकादशी व्रत : सुख-समृद्धि प्रदान करता है यह व्रत, यह उपाय अपनाएं


भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत बहुत पावन व्रत माना जाता है। प्रत्येक माह दो एकादशी का व्रत रखा जाता है। एकादशी व्रत में भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष आराधना की जाती है। एकादशी तिथि पर वास्तु के मुताबिक, कुछ विशेष उपाय करने से जीवन से समस्याएं दूर हो जाती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
एकादशी व्रत बहुत ही पुण्यदायी व्रत है। इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ करने से हर पाप का नाश होता है। इस तिथि पर घर में पौधे रोपें। घर की पूर्व दिशा में तुलसी जी का पौधा लगाएं। इस दिन केले के वृक्ष की जड़ में दीपक जलाएं। एकादशी के दिन घर की छत पर गेंदे के पुष्प का पौधा लगाने से दांपत्य जीवन में मधुरता और घर में सुख शांति आती है। घर की छत पर पीला ध्वजा लगाएं। इस दिन दंपति को आंवले का पौधा घर के आंगन में रोपना चाहिए। एकादशी पर पका हुआ भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक रहें। दूषित विचार तक मन में न लाएं। इस दिन भगवान श्री हरि को पीले रंग के पुष्प अर्पित करें। भगवान विष्णु की पूजा करते समय खीर का भोग लगाएं। खीर में तुलसी की पत्तियां अवश्य डालें। इस दिन पीले रंग के फल, कपड़े व अनाज भगवान विष्णु को अर्पित करें। जरूरतमंदों को दान दें। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। घर के पूजा स्‍थान पर कलश की स्‍थापना करें। कलश के ऊपर भगवान श्री हरि विष्‍णु की मूर्ति स्थापित करें। सुगंधित फूल, नारियल, मिष्ठान्न, ऋतुफल और तुलसी दल भगवान विष्णु को समर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। श्रीहरि की आरती करें। रात्रि जागरण करें। भगवान श्री हरि विष्णु के भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।

 

Winter FOOD: सरसों का साग और मक्की की रोटी

 


सरसों का साग और मक्की की रोटी पॉपुलर पंजाबी डिश है। यह एक ऐसी क्लासिक डिश है जिसे हर कोई बहुत स्वाद से खाता है। यह एक ऐसी​ डिश है जो सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही खाने को मिलती है। सरसों के साग में ढेर सारा घी और मक्खन डालकर खाने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

सरसों का साग बनाने के लिए सामग्री: सरसों का साग बनाते समय में इसमें सरसों के पत्तों के साथ बथुआ और पालक भी डाला जाता है। उबाल कर पीसने के बाद साग को प्याज, टमाटर आदि का तड़का दिया जाता है।

वैसे तो साग और मक्की की रोटी का बेस्ट कॉम्बिनेशन हैं। लेकिन आप इसके साथ छाछ या लस्सी भी सर्व कर सकते हैं।

चलिए जानते हैं इसके लिए लगने वाली सामग्री

साग के लिए:

750 ग्राम सरसों का साग, 250 ग्राम पालक का साग, 250 ग्राम बथुए का साग, 2 कप पानी, एक चुटकी नमक, 1 1/2 कप मक्की का आटा, 4 हरी मिर्च

25 ग्राम अदरक,6 लहसुन की कली, 2 प्याज, घी, 1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 टी स्पून गरम मसाला, 1/2 टी स्पून धनिया पाउडर। 



मक्की की रोटी:

1/2 kg मक्की का आटा, आटा गूंथने के लिए पानी, तलने के लिए घी


जानते हैं ...सरसों का साग और मक्की की रोटी बनाने की वि​धि

1.प्रेशर कुकर में तीनों साग को डालें उसमें नमक और पानी डालकर धीमी आंच पर 1 1/2 घंटे तक पकाएं।

2.साग का पानी निचोड़कर निकाल लें और पानी को एक तरफ रख दें। साग को कुकर में अच्छे से मैश करें, इसमें मक्की का आटा डालकर कर चलाएं।

3.साग का पानी उसमें वापस डाल दें साथ ही नॉर्मल ताजा पानी डालकर कर इसे धीमी आंच पर पकाएं।

4.हरी मिर्च और अदरक डालकर साग को गाढ़ा होने तक पकाएं।

5.तड़का तैयार करने के लिए प्याज, अदरक, लहसुन, लाल मिर्च, गरम मसाला, धनिया डालकर भूनें, प्याज को गोल्डन ब्राउन होने दें।

6.तड़के को साग में डालकर मिक्स करें कटी अदरक से गार्निश करें।

मक्की की रोटी :

1.मक्की का आटा लें और गूंथ लें।

2.तवा गर्म कर करें और उस पर थोड़ा सा घी डालें ताकि रोटी उस पर चिपके नहीं।

3.चकले पर गोल आकार की मक्की की रोटी तैयार कर लें। इसके बाद बहुत आराम से तवे पर डालें।

4.रोटी पर घी लगाकर गोल्डन ब्राउन होने तक सेकें।

5.रोटी को सरसों का साग, गुड़ और सफेद मक्खन के साथ सर्व करें।

Wednesday, 17 February 2021

वसंत पंचमी के दिन बेबी समीक्षा साहा का हाथे खोड़ी यानि विद्या आरंभ संस्कार किया गया

वसंत पंचमी के दिन बेबी समीक्षा साहा का हाथे खोड़ी यानि विद्या आरंभ संस्कार किया गया। ‘हाते खोड़ी’ जिसका अर्थ है ‘हाथ में चाक ’ एक बंगाली परंपरा है जिसमें बच्चे अपना पहला अक्षर लिखते हैं। यह बच्चे की शाब्दिक यात्रा की शुरुआत माना जाता है। ‘हाथे खोड़ी’ सरस्वती पूजा या वसंत पंचमी (वसंत का पांचवा दिन) के दिन किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सरस्वती विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी हैं। तो, बच्चे इस दिन से देवी सरस्वती के आशीर्वाद से लिखना शुरू करते हैं। परंपरा के अनुसार, छोटे बच्चों को पंडित की गोद में बैठाकर या समीप में बैठाकर नई स्लेट में चाक से मुख्य रूप से पहले अक्षर ओएम या ए, बी, सी, 1 से 10 तक गिनती या कुछ बंगाली वर्णमाला जैसे "के-ए", "ख-ए" लिखवाते हैं।



‘हाते खोड़ी’ एक पुजारी और दोस्तों और परिवार की उपस्थिति में आयोजित की जाती है। परंपरागत रूप से, एक नया चाक और स्लेट / चॉकबोर्ड रखा जाता है और पुजारी बच्चे को अपना पहला अक्षऱ लिखने में मदद करता है। यदि चाक और बोर्ड उपलब्ध नहीं है, तो एक नोटबुक और पेन / पेंसिल का भी उपयोग किया जा सकता है।





Sunday, 7 February 2021

गुलाब के हर रंग हैं खास, जानें किस रंग के गुलाब की क्या है खासियत

प्यार का इजहार करने के लिए Valentine Week की 7 फरवरी से शुरुआत होने जा रही है। सप्ताह का पहला दिन Rose Day के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन गुलाब के फूल देकर अपने पार्टनर के सामने अपनी भावनाओं का इजहार किया जाता है। इस दिन अपने इमोशन्स को बताने के लिए गुलाब के फूलों का सबसे ज्यादा महत्व है यही वजह है कि प्यार के इस सप्ताह के पहले दिन का नाम Rose Day रखा गया है।


अलग अलग तरह की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अलग-अलग रंगों के गुलाब के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। लाल रंग का गुलाब कुछ कहता है तो वहीं गुलाबी या पीले रंग के गुलाब से कुछ अलग तरह की भावनाएं व्यक्त की जाती हैं।

गुलाब के रंगों की खासियत

लाल रंग

लाल गुलाब का पारंपरिक तौर पर प्यार का इजहार करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि प्यार का रंग लाल है ऐसे में अपने पार्टनर के सामने प्यार जताने के लिए Red Rose दिया जाता है। अगर पहली बार प्यार का इजहार करने जा रहे हैं तो लाल रंग का गुलदस्ता बेहद काम का साबित हो सकता है।

पीला रंग

लाल रंग का गुलाब जहां प्यार का इजहार करने के लिए है तो वहीं पीले रंग का गुलाब दोस्ती का प्रतीक होता है। नई दोस्ती की शुरुआत के लिए पीले रंग का गुलाब दिया जाता है। इसका मतलब है कि आप एक बहुत अच्छे दोस्त हैं। अगर आप अब रोमांटिक रिलेशनशिप में नहीं हैं तो पीले रंग का गुलाब देकर अपनी दोस्ती की भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है।

सफेद रंग


सफेद रंग का गुलाब सबसे शुद्ध माना जाता है। सफेद रंग शुद्धता, मासूमियत और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। इनका मुख्य तौर पर इस्तेमाल शादियों में किया जाता है जिसका मतलब नई शुरुआत और सदाबहार प्यार से होता है। सफेद रंग के गुलाब को दुल्हन का गुलाब भी कहते हैं।


बैंगनी रंग


बैंगनी रंग का गुलाब रंगों के लिहाज से बेहद अनूठा है। अगर किसी को देखते हुए आप पकड़ा गए हैं तो बैंगनी रंग के गुलाब को दिया जा सकता है। यह सीक्रेट क्रश भी हो सकता है।

गुलाबी रंग


गुलाबी रंग का Rose इसकी सबसे ज्यादा विविधता वाला रंग है। इस रंग का गुलाब आभार व्यक्त करने के लिए किया जाता है। हालांकि वेलेंटाइन वीक में इसका इस्तेमाल करने से बचें।

क्रीम रंग


क्रीम कलर का गुलाब आकर्षण और शानदार विचारश्रृंखला का प्रतीक है। क्रीम गुलाब आम तौर पर पिंक कलर के गुलाब के साथ मिक्स कर दिया जाता है। अगर किसी को गुलाब का बुके देना है तो इन दोनों गुलाब को साथ में ना रखें।


Happy Rose Day


 

Friday, 1 January 2021

दिल में बसा लो आने वाले साल को

सुजाता साहा

साल 2021 की शुरुआत हो गई है. नया साल जीवन में नई खुशियां लेकर आए, इस वजह से लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं. मंगलकामनाओं के साथ नए संकल्प लेते हैं. अगर आप मौजूदा वर्ष की चुनौतियों, संघर्षों और अशुभताओं को नए साल में नहीं लेकर जाना चाहते।



2020 को सबसे ज्यादा नकारात्मक कोरोना वायरस की वजह से माना जाता है, कई लोगों का कहना है कि ये पूरा साल ही कोरोना की वजह से खराब हो गया। इसलिए अब लोगों को 2021 से बहुत उम्मीदें है। 2021 का खास इंतजार इसलिए भी है कि नए साल में लोगों को कोरोना वैक्सान के नाम को तोहफा भी मिल सकता है। असल में ऐसी उम्मीद है कि भारत में नए साल की शुरुआत के साथ ही भारतीयों को कोविड-19 वैक्सीन दी जा सकती है।

राजधानी दिल्ली में कोरोना को देखते हुए पहले ही नए साल के जश्न को लेकर गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। नए साल की पूर्व संध्या पर ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस सड़कों पर मुस्तैद रहेगी।

नए साल का जश्न कई देशों में अलग-अलग वक्त पर मनाया गया. सबसे पहले आर्कटिक देश टोंगा में 2021 दस्तक दिया. हालांकि, मुख्य रूप से न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया ऐसे देश हैं जहां भारतीय समयानुसार जल्दी नया साल आ गया। भारत के वक्त के अनुसार, गुरुवार दोपहर 3.30 बजे यहां नया साल आ गया। 

भारत में नए साल को देखते हुए काफी सतर्कता बरती जा रही है. नए साल से ठीक पहले कोरोना का नया स्ट्रेन भारत में आया है, ऐसे में कई राज्यों ने अपने यहां नाइट कर्फ्यू लगा दिया है. नई दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों ने अपने यहां पूर्ण या आंशिक रूप से नाइट कर्फ्यू लगाया है. 



रात 11 बजे के बाद बाहर निकलने पर मनाही है, भीड़ में ना जाने की सलाह है और साथ ही ड्राइविंग करने वालों को ब्लड टेस्ट करवाना पड़ सकता है. ऐसे में कोरोना से जुड़ी गाइडलाइन्स का पालन करते हुए ही लोग नया साल मनाएं, ताकि कोई दिक्कत ना हो.

साल का पहला दिन अगर लोग उत्साहित होकर खुशी-खुशी मनाएंगे तो पूरा साल खुशनुमा बीतेगा। इस दिन जहां कुछ लोग मंदिर और घर में पूजा-पाठ व हवन का आयोजन करते हैं। वहीं, कई लोग शाम होते ही पार्टी करने लगते हैं। नाच-गाना और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ-साथ मजेदार खेलों के माध्यम से खुद को और बाकियों को एंटरटेन करते हैं।

नया साल खुद में नई सोच- उम्मीद विकसित करने का और ऊर्जा संचय का समय होता है। पिछली असफलताओं, पुरानी परेशानियों से सबक लेते हुए पूरी सावधानी से नया कदम उठाने की देर है।

भूल जाओ बीते हुए कल को

दिल में बसा लो आने वाले कल को

मुस्कुराओ चाहे जो भी हो पल

खुशियां लेकर आएगा आने वाला कल।।


Thursday, 28 May 2020

बचपन की चुलबुलाहट से लेकर एक सशक्त महिला तक का सफर तय करती, गाँजे की कली

देश की सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम की छत्तीसगढ़ी कहानी पर आधारित व राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित फ़िल्म गाँजे की कली योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में तैयार की गई यह फिल्म दर्शकों के सामने एक सवाल छोड़ती है। आमतौर पर बनने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्मों से यह फिल्म काफी अलग है। एक विद्रोह करने वाली महिला पर आधारित फिल्म है, जो बचपन की चुलबुलाहट से लेकर एक सशक्त महिला तक का सफर तय करती है। छत्तीसगढ़ की पहली कला फ़िल्म गाँजे की कली यु ट्यूब में रिलीज हो चुकी है। इस फ़िल्म को देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी अच्छी प्रतिक्रिया आ रही है। देश भर में फ़िल्म रंगमंच साहित्य कला से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया आ रही है। अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड,आस्ट्रेलिया नेपाल में रहने वाले भारतीयों द्वारा भी इस फ़िल्म को देखा व पसंद किया गया। है।छत्तीसगढ़ की इस कला फ़िल्म को अब तक 4 हजार से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। 

बचपन की चुलबुलाहट से लेकर एक सशक्त महिला तक का सफर तय करती, गाँजे की कली

गाँजे की कली यह पहली छत्तीसगढ़ी फ़िल्म है जो छत्तीसगढ़ से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इस फ़िल्म की पहली स्क्रिनिग जागरण अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल के तहत दिल्ली व मुम्बई रायपुर में हुई थी। फिर देश के कई शहरों भोपाल, ग्वालियर खैरागढ़, रायगढ़, वर्धा नागपुर, इलाहाबाद , गोरखपुर बिलासपुर में इसका विशेष प्रदर्शन भी किया गया।


भारतीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित अभिनेत्री नेहा सराफ का रंगमंच का अनुभव सघन है। इस फिल्म में भी वे चुलबुली लडक़ी से लेकर एक सशक्त महिला का किरदार , बड़ी सहजता के साथ निभाती हैं, जो कि दर्शक को गंभीर विमर्श के लिए तैयार करता है । नेहा बॉलीवुड की कई चर्चित फिल्मों हीरोइन, लुका छिपी ,ड्रीमगर्ल जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया है। इसके साथ ही अघनिया के पिता की भूमिका में दीपक तिवारी ' विराट ' का सहज अभिनय उनकी रंगमंच के परिश्रम का फलन है। पूनम तिवारी द्वारा निभाए किरदार द्वारा अघनिया को रंगीलाल के यहां से भागने में मदद करना, पुरुषवादी मानसिकता से उपजे नारी के मानसिक शोषण के विरुद्ध क्रांति - बिगुल है जिसने पूरी कहानी को मोड़ दिया। दीपक तिवारी और पूनम तिवारी हबीब तनवीर व नया थियेटर के चर्चित अभिनेता -अभिनेत्री हैं जिनके गीत व अभिनय की चर्चा देश भर में होती है। फिल्म के अंत में कर्मा गीत पूनम तिवारी के स्वर में धोखे के बाद उपजी निराशा का प्रतीक है, पर कहानी आगे बढ़ती है और आपको निराश नहीं करती। 


छत्तीसगढ़ की सत्य घटना पर आधारित फ़िल्म में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के कलाकारों ने काम किया है। इस फ़िल्म की पटकथा व संवाद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अशोक मिश्रा ने लिखी है इसी तरह फ़िल्म की एडिटिंग असीम सिन्हा द्वारा किया गया है। असीम सिन्हा बॉलीवुड के मशहूर एडिटर है ज़ेडप्ल्स, वेलडन अब्बा, वेलकम टू सज्जनपुर, मोहल्ला अस्सी, संविधान जैसे कई फिल्मों के एडिटर हैं। तकनीकी दृष्टिकोण से भी यह ऐसी पहली फ़िल्म है जो सिंक साउंड है इस फ़िल्म में डबिंग नहीं किया गया, बल्कि लोकेशन साउंड रिकार्ड किया गया है। इसके साउंड डिजाइनर संतोष कुमार है। इस फ़िल्म के सिनेमेटोग्राफर राजीब शर्मा हैं जिन्हें फोटो ग्राफी के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जा चुका है। फ़िल्म का टाइटल भी अनोखा है इसका डिजाइन रायपुर की एनिमेटर आस्था कपिल चौबे द्वारा किया गया है। फ़िल्म में संगीत छत्तीसगढ़ के युवा संगीत निर्देशक चंद्रभूषण वर्मा ने दिया है।